“गुटर-गुटर-गूँ बोल कबूतर”

गुटर-गुटर-गूँ बोल, कबूतर, कानों में रस घोल, कबूतर। बैठा तू छत की मुँडेर पर देख रहा क्या लचक-लचककर, बोल जरा, मैं भी तो सुन लूँ...

बंदर और मदारी

देखो बच्चों बंदर आया,एक मदारी उसको लाया। उसका है कुछ ढंग निराला,कानों में पहने है बाला। फटे-पुराने रंग-बिरंगे कपड़े हैं उसके बेढंगे। मुँह डरावना आँखें...

किताबों मे बिल्ली के बच्चे

किताबों मे बिल्ली ने बच्चे दिए हैं, ये बच्चे बड़े हो के अफ़सर बनेंगे दरोगा बनेंगे किसी गाँव के ये, किसी शहर के ये कलेक्टर...

कम्प्यूटर पर चिड़िया

बहुत देर से कम्प्यूटर पर बैठी चिड़िया रानी बड़े मज़े से छाप रही थी, कोई बड़ी कहानी तभी अचानक चिड़िया ने जब,गर्दन ज़रा घुमाई किंतु...
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