नटखट कविताएँ

नटखट कविताएँ नटखट दुनिया

“गुटर-गुटर-गूँ बोल कबूतर”

गुटर-गुटर-गूँ बोल, कबूतर, कानों में रस घोल, कबूतर। बैठा तू छत की मुँडेर पर देख रहा क्या लचक-लचककर, बोल जरा, मैं भी तो सुन लूँ गीत तेरा अनमोल, कबूतर! तूने सिखलाया है गाना मुक्त हवा में उड़े जाना, तुझसे हमने सीख लिया है आजादी का मोल, कबूतर! जा, उस डाली पर भी कहना प्यारे भाई, […]

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चाँद का कुर्ता

हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला सिलवा दो माँ मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला सन-सन चलती हवा रात भर जाड़े से मरता हूँ ठिठुर-ठिठुर कर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ। आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का न हो अगर तो ला दो कुर्ता ही कोई भाड़े […]

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बया

बया हमारी चिड़िया रानी। तिनके लाकर महल बनाती, ऊँची डालों पर लटकाती, खेतों से फिर दाना लाती नदियों से भर लाती पानी। तुझको दूर न जाने देंगे, दानों से आँगन भर देंगे, और हौज में भर देंगे हम मीठा-मीठा पानी। फिर अंडे सेयेगी तू जब, निकलेंगे नन्हें बच्चे तब हम आकर बारी-बारी से कर लेंगे […]

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बंदर और मदारी

देखो बच्चों बंदर आया,एक मदारी उसको लाया। उसका है कुछ ढंग निराला,कानों में पहने है बाला। फटे-पुराने रंग-बिरंगे कपड़े हैं उसके बेढंगे। मुँह डरावना आँखें छोटी, लंबी दुम थोड़ी-सी मोटी। भौंह कभी है वह मटकाता, आँखों को है कभी नचाता। ऐसा कभी किलकिलाता है, मानो अभी काट खाता है। दाँतों को है कभी दिखाता, कूद-फाँद […]

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किताबों मे बिल्ली के बच्चे

किताबों मे बिल्ली ने बच्चे दिए हैं, ये बच्चे बड़े हो के अफ़सर बनेंगे दरोगा बनेंगे किसी गाँव के ये, किसी शहर के ये कलेक्टर बनेंगे न चूहों की इनको ज़रूरत रहेगी, बड़े होटलों के मैनेजर बनेंगे ये नेता बनेंगे औ’ भाषण करेंगे, किसी दिन विधायक, मिनिस्टर बनेंगे वकालत करेंगे सताए हुओं की, बनेंगे ये […]

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कोयल

काली-काली कू-कू करती, जो है डाली-डाली फिरती! कुछ अपनी ही धुन में ऐंठी छिपी हरे पत्तों में बैठी जो पंचम सुर में गाती है वह ही कोयल कहलाती है। जब जाड़ा कम हो जाता है सूरज थोड़ा गरमाता है तब होता है समा निराला जी को बहुत लुभाने वाला हरे पेड़ सब हो जाते हैं […]

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मिर्च का मज़ा

एक काबुली वाले की कहते हैं लोग कहानी, लाल मिर्च को देख गया भर उसके मुँह में पानी सोचा, क्या अच्छे दाने हैं, खाने से बल होगा, यह जरूर इस मौसम का कोई मीठा फल होगा। एक चवन्नी फेंक और झोली अपनी फैलाकर, कुंजड़िन से बोला बेचारा ज्यों-त्यों कुछ समझाकर; “लाल-लाल पतली छीमी हो चीज […]

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डॉ वंदना वर्मा की कविता “चाँद”

मम्मी देखो न ये चाँद टुकुर-टुकुर तकता है मुँह से तो कुछ न बोले पर मन ही मन हँसता है चैन से मुझको सोने नहीं देता ख़ुद सारी रात चलता है मम्मी देख न ये चाँद टुकुर-टुकुर तकता है इसको भी चपत लगाओ ख़ूब ज़ोर से डाँट लगाओ मुझको नींद आती है फिर ये सारी […]

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कम्प्यूटर पर चिड़िया

बहुत देर से कम्प्यूटर पर बैठी चिड़िया रानी बड़े मज़े से छाप रही थी, कोई बड़ी कहानी तभी अचानक चिड़िया ने जब,गर्दन ज़रा घुमाई किंतु न जाने किस कारण वह,ज़ोरों से चिल्लाई कौआ भाई फुदक-फुदक कर,शीघ्र वहाँ पर आए “तुम्हें क्या हुआ बहिन चिरैया” कौआ जी घबराए चिड़िया बोली, “पता नहीं है, कैसी ये लाचारी […]

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गिलहरी का घर

एक गिलहरी एक पेड़ पर बना रही है अपना घर, देख-भाल कर उसने पाया खाली है उसका कोटर कभी इधर से, कभी उधर से फुदक-फुदक घर-घर जाती, चिथड़ा-गुदड़ा, सुतली, तागा ले जाती जो कुछ पाती ले जाती वह मुँह में दाबे कोटर में रख-रख आती, देख बड़ा सामान इकट्ठा किलक-किलककर वह गाती चिथड़े-गुदडे़, सुतली, धागे- […]

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