एक शाइर सौ शेर

एक शाइर सौ शेर शाइरी साहित्य दुनिया

फ़िराक़ गोरखपुरी के 40 शेर

1. तुम्हें क्यूँकर बताएँ ज़िंदगी को क्या समझते हैं समझ लो साँस लेना ख़ुद-कुशी करना समझते हैं 2. बस इतने पर हमें सब लोग दीवाना समझते हैं कि इस दुनिया को हम इक दूसरी दुनिया समझते हैं 3. कहाँ का वस्ल तन्हाई ने शायद भेस बदला है तिरे दम भर के मिल जाने को हम […]

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एक शाइर, सौ शेर: मीर तक़ी मीर

1. फ़क़ीराना आए सदा कर चले, कि मियाँ ख़ुश रहो हम दुआ कर चले 2. जो तुझ बिन न जीने को कहते थे हम सो इस अहद को अब वफ़ा कर चले 3. वो क्या चीज़ है आह जिसके लिए हर इक चीज़ से दिल उठा कर चले 4. कोई ना-उमीदाना करते निगाह सो तुम […]

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एक शाइर, सौ शेर: कैफ़ी आज़मी

1- की है कोई हसीन ख़ता हर ख़ता के साथ थोड़ा सा प्यारा भी मुझे दे दो सज़ा के साथ 2- मंज़िल से वो भी दूर था और हम भी दूर थे हमने भी धूल उड़ाई बहुत रहनुमा के साथ 3- ऐसा लगा ग़रीबी की रेखा से हूँ बुलंद पूछा किसी ने हाल कुछ ऐसी […]

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एक शाइर, सौ शेर: जिगर मुरादाबादी

1- अपना ज़माना आप बनते हैं अहल-ए-दिल हम वो नहीं कि जिनको ज़माना बना गया 2- आँखों का क़सूर था न दिल का क़सूर था आया जो मेरे सामने मेरा ग़ुरूर था 3- वो थे न मुझसे दूर न मैं उनसे दूर था आता न था नज़र तो नज़र का क़सूर था 4- जिस दिल […]

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एक शाइर, सौ शेर: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

1. दोनों जहान तेरी मुहब्बत में हार के, वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के 2. इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन देखे हैं हमने हौसले पर्वरदिगार के 3. दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया तुझसे भी दिल-फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के 4. भूले से मुस्कुरा तो दिए थे वो आज […]

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एक शाइर, सौ शेर: मिर्ज़ा ग़ालिब

1. फिर उसी बेवफ़ा पे मरते हैं, फिर वही ज़िंदगी हमारी है 2. बे-ख़ुदी बे-सबब नहीं ‘ग़ालिब’ कुछ तो है जिसकी पर्दा-दारी है 3. हम भी दुश्मन तो नहीं हैं अपने, ग़ैर को तुझ से मुहब्बत ही सही 4. हम कोई तर्क-ए-वफ़ा करते हैं, न सही इश्क़ मुसीबत ही सही 5. यार से छेड़ चली […]

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एक शाइर, सौ शेर: मुहम्मद इक़बाल

1. गुज़र जा अक़्ल से आगे कि ये नूर चराग़-ए-राह है मंज़िल नहीं है 2. ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है 3. कभी हम से कभी ग़ैरों से शनासाई है बात कहने की नहीं तू भी तो हरजाई है 4. ख़ुदावंदा […]

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