“द जर्नी ऑफ़ शिवा” एक ऐसी यात्रा पर ले जाती है जहाँ मेहनत के रास्ते प्रसिद्धि की राह है

किताबें एक यात्रा की तरह होती हैं और उन्हें पढ़ते हुए हम काल्पनिक या वास्तविक कितनी ही यात्राएँ तय करते हैं। एक ऐसा ही सफ़र तय हुआ जब हमने हाल ही में मिली किताब “The Journey Of Shiva” पढ़ी। इस किताब को लिखा है जयश्री शेट्टी ने इस किताब को लिखा है, इस किताब में कहानी है शिवराम भंडारी की। शिवाराम भंडारी जो बॉलीवुड में शिवा के नाम से जाने जाते हैं, यही नहीं उनकी “Shiva’s” नाम की एक हेयर स्टाइलिंग का ब्राण्ड भी है।

जहाँ बॉलीवुड से जुड़ी हर बात लोगों के लिए आश्चर्य का विषय होती है वहीं बॉलीवुड में आने वाले लोगों की कहानी भी अक्सर फ़िल्मी कहानी से कम पेंचिदा नहीं होती। कुछ ऐसे ही कहानी है शिवाराम भंडारे की भी। बचपन में पिता को खो देने के कारण पढ़ाई छोड़कर माँ के साथ घरख़र्च निकालने में जुट गए शिवा ने बहुत छोटी उम्र में ही दुनियादारी के सारे रंग देख लिए थे। साथ ही पहचान लिया था मेहनत का महत्व भी, शिवा ने जो इतना बड़ा ब्राण्ड अपने नाम के साथ जोड़ा है वो पूरी तरह से उनकी अपनी मेहनत का नतीजा है।

एक ऐसी जगह से आने वाला बच्चा जिसे एक अच्छा बचपन तक नहीं मिल पाया, आज अपना ऐसा नाम बना पाया है तो उसका सबसे बड़ा कारण है लगातार आगे बढ़ने की कोशिश करना और हार न मानते हुए परिस्थिति से लड़ते जाना। शिवा की ज़िंदगी किसी भी इंसान के लिए प्रोत्साहित करने वाली हो सकती है। शिवा के सामने कई तरह की मुश्किलें आयीं लेकिन उन्होंने हर बार सिर्फ़ और सिर्फ़ आगे बढ़ने का ही रास्ता चुना और उनकी मेहनत रंग लायी।

शिवा की कहानी तो सीखने के लिए बहुत कुछ देती ही है लेकिन उसे इतनी अच्छी तरह पेश करने का काम बख़ूबी किया है लेखिका जयश्री शेट्टी ने। जयश्री का लेखन धाराप्रवाह है उसे पढ़ते हुए रुकने का मन नहीं करता। इस किताब में एक बात और जो भायी वो ये कि जब भी कोई नया चैप्टर शुरू होता है उससे सम्बंधित एक क्वोट लिखा होता है। ये क्वोट एडिसन, नेलशन मंडेला, वॉल्ट डिज़्नी जैसे लोगों के हैं और उनकी कही बातों का शिवा के जीवन की उस घटना के साथ कनेक्शन भी बनता है, जो बहुत ही अच्छा संयोग लगता है।

जो कहते हैं कि मेहनत से आजकल कुछ नहीं होता उन्हें ये किताब ज़रूर पढ़ना चाहिए। साथ ही जो लोग ये कहते हैं कि ग़रीबी से निकल के अमीर होना या नाम कमाना सिर्फ़ फ़िल्मों में होता है उन्हें भी इस किताब को पढ़ना चाहिए इससे उन्हें पता चलेगा कि फ़िल्में आम ज़िंदगी से ही प्रभावित होती हैं। एक बात और इस किताब से सीखी जा सकती है वो ये कि बॉलीवुड में नाम कमाना न बहुत आसान है और न ही बहुत मुश्किल, बस अपने पास कोई प्रतिभा होनी चाहिए और मन में एक हौसला होना चाहिए फिर हर मेहनत रंग लाती है।

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