अलफ़ाज़ की बातें (11): हमला-आवर, आशुफ़्ता, गुज़िश्ता, दस्त और दश्त…

हमला-आवर (حملہ آور): हमला-आवर एक ऐसा लफ़्ज़ है जिसे आम लोग ‘हमलावर’ पढ़ते हैं जोकि सही नहीं है. इसका सही उच्चारण हम’ल’आवर ही है. उर्दू शा’इरी में इसका वज़्न 21-22 लिया जाता है,(हम-2, ल-1, आ-2, वर-2).

साक़ी फ़ारूक़ी का मत’ला देखिये-

हमला-आवर कोई अक़ब से है,
ये तआक़ुब में कौन कब से है

(अक़ब- पीछे)

आशुफ़्ता (آشفتہ): आशुफ़्ता का अर्थ होता है अस्त-व्यस्त. आशुफ़्ता और इससे जुड़े शब्द उर्दू शाइरी में अक्सर इस्तेमाल होते हैं.जैसे आशुफ़्ता-सर (जिसका सिर फिर गया हो), आशुफ़्ता मिज़ाज (जिसका मन एकाग्र ना हो), आशुफ़्ता-हाल (मुसीबत में फँसा हुआ). आशुफ़्ता का वज़्न 222 होगा, “ता” का वज़्न गिराने पर 221 लिया जाएगा. (आ-2, शुफ़्-2, ता-2/1)

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता का शे’र-

आशुफ़्ता-ख़ातिरी वो बला है कि ‘शेफ़्ता’
ताअत में कुछ मज़ा है न लज़्ज़त गुनाह में

गुज़श्ता या गुज़िश्ता (दोनों सही हैं) (گزشتہ): गुज़िश्ता का अर्थ होता है गुज़रा हुआ, भूतकाल, माज़ी, इत्यादि. गुज़िश्ता का वज़्न 122 लिया जाएगा. (गु-1, ज़श्-2, ता-2)[ता का वज़्न गिराया जा सकता है, या’नी गुज़िश्ता का वज़्न 121 भी लिया जा सकता है]

फ़ानी बदायूँनी का शेर-

हर नफ़स उम्र-ए-गुज़िश्ता की है मय्यत ‘फ़ानी’,
ज़िंदगी नाम है मर-मर के जिए जाने का

दस्त (دست): इसका अर्थ होता है हाथ. इससे कई शब्द और बनते हैं जैसे दस्त-ओ-पा (हाथ-पाँव), दस्त’ब’दुआ (ईश्वर से दुआ में हाथ उठाये हुए), दस्तख़त(हस्ताक्षर, ये लफ़्ज़ इसी तरह विकसित हुआ है, आमतौर पर हाथों के इस्तेमाल से हस्ताक्षर किये जाते हैं). दस्त का वज़्न 21 लिया जाता है. (दस्-2, त-1) [दस्त का एक अर्थ ‘पतला शौच’ भी होता है]

मुसहफ़ी का शे’र-

उसके मक़्तल में मिरा ख़ून बटा दस्त-ब-दस्त,
ख़ूब-रू जैसे लगाते हैं हिना दस्त-ब-दस्त

दश्त (داشت)– इसका अर्थ होता है जंगल, बियाबान. इसका वज़्न 21 लिया जाता है. (दश्-2, त-1)

शकेब जलाली का शे’र-

ये एक अब्र का टुकड़ा कहाँ-कहाँ बरसे,
तमाम दश्त ही प्यासा दिखाई देता है

(अब्र- बादल)

[फ़ोटो क्रेडिट (फ़ीचर्ड इमेज): जीन बप्तिस्ते हेत द्वारा 1781 में बनायी गयी पेंटिंग The Attack (The Dog Attacking the Turkey Cock)]

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