“ये खटमल ये मक्खी ये मच्छर की दुनिया”- अहमद अल्वी

ये खटमल ये मक्खी ये मच्छर की दुनिया
ये लंगूर भालू ये बंदर की दुनिया
ये कुत्तों गधों और ख़च्चर की दुनिया
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

ये चोरों ये लुच्चों लफ़ंगों की दुनिया
ये कमज़ोरों की और दबंगों की दुनिया
तप-ए-दिक़ के बीमार चंगों की दुनिया
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

ये बुश-जूनीयर और ओबामों की दुनिया
ये अमरीकियों के ग़ुलामों की दुनिया
ये मुल्ला-उमर और उसामों की दुनिया
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

जनाबों की इज़्ज़त-मआबों की दुनिया
ये अच्छों की दुनिया ख़राबों की दुनिया
ये चमचों को मिलते खिताबों की दुनिया
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

रईसों की दुनिया में कड़कों की दुनिया
ये बे-कार आवारा लड़कों की दुनिया
ट्रैफ़िक से बद-हाल सड़कों की दुनिया
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है


अहमद अल्वी

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