आज़ादी

सुबह से ही घर में हलचल मची हुई है..ननकू आँगन में खड़ा होकर ज़ोर-ज़ोर से कविता सुना रहा है चीकू और रसगुल्ला उसको ध्यान से सुन रहे हैं।

“देश हमारा सबसे प्यारा
ऊँचा लहरे तिरंगा प्यारा
देश के वीरों को सलाम है
देश के वीरों को प्रणाम है
आपस में मिल जुलकर रहना
वीरों का ये ही पैग़ाम है”

दादी बाहर आकर देखती हैं और उसे देखकर ख़ुश होती हैं..तभी माँ भी वहाँ आती हैं

“इनका कलेंडर तो पंद्रह अगस्त में ही अटक गया है”

दादी, माँ की बात सुनकर हँसने लगती हैं। माँ वापस अंदर जाती हैं तभी दादी को देखकर ननकू दौड़ हुआ दादी के पास आता है..

“पता है दादी पहले झंडा फहराते हैं फिर जन गण मन होता है, सब ऐसे खड़े हो जाते हैं..बिलकुल ऐसे”
ये बोलकर ननकू सावधान होकर खड़े हो जाता है और उसे देखकर चीकू भी आगे के दो पैर उठाकर खड़े होने की कोशिश करता है..चीकू को देखकर रसगुल्ला भी सामने के पैर उठाता है लेकिन तुरंत लुढ़क जाता है। झट से आजू-बाज़ू देखकर खड़ा हो जाता है ननकू को मज़ा आ जाता है और वो रसगुल्ला को देखकर हँसने लगता है। रसगुल्ला ननकू के पास उछ्लने लगता है। तभी ननकू को आगे की बात याद आ जाती है और वो दादी को बताने लगता है..

“दादी, सर बोले कि आज के दिन हम आज़ाद हुए थे?..आज़ाद क्या होता है?”

“आज़ाद मतलब…हाँ याद है तूने और बबलू ने भोला के घर का तोता पिंजरा खोलकर उड़ा दिया था?..तो वो तोता आज़ाद हो गया..”

दादी की बात सुनकर ननकू सोच में पड़ गया, उसे इस तरह देख दादी ने पूछा- “क्या हुआ?”

“दादी..तो हम सब पहले पिंजरे में रहते थे?”

“नहीं..सिर्फ़ पिंजरा खोलने से ही आज़ाद थोड़ी होते हैं। जब अपने मन से काम करने मिले और हर एक को सारी चीज़ें मिले तब होती है आज़ादी..समझा?”

“तो इसका मतलब है कि मैं आज़ाद नहीं हूँ..”

“ऐसा कैसे पता चला?”- दादी मुस्कुराती हुई बोलीं

“जब मुझे सोने का मन नहीं करता तो भी माँ सुला देती हैं और मन नहीं होने से सारी सब्ज़ी भी खिला देती हैं..तो मेरे मन का काम नहीं हुआ न..फिर मैं आज़ाद कैसे हुआ?”- ननकू ने मासूमियत से कहा

ननकू की इस बात पर दादी को हँसी आ गयी लेकिन ननकू को तो सवाल का जवाब चाहिए था..दादी ने उसे अपनी गोद में बिठाया और प्यार से उसके गाल को सहलाया और कहा

“अभी तू छोटा है न तो माँ तेरी देखभाल करती है, पर जब तू बड़ा हो जाएगा तो अपने मन से सारा काम करना..अब तू भी तो रसगुल्ला और चीकू का ध्यान रखता है न..रसगुल्ला को गोद में उठा लेता है अगर रसगुल्ला बोलेगा कि मुझे तो चलना है लेकिन ननकू बार-बार गोदी में उठा लेता है..तो?”

“रसगुल्ला तो छोटा है न..इसलिए मैं…” कुछ सोचकर..”अच्छा..माँ भी ऐसे ही करती है न..क्योंकि मैं छोटा हूँ”

“हाँ…” दादी के ये कहते ही ननकू उठा और दादी के सामने खड़े होकर बोला

“दादी…आज न मैं और बबलू जाकर सबके घर से पिंजरे से चिड़िया उड़ा देंगे”- ननकू ये बोलकर चीकू और रसगुल्ला के साथ नाचने लगा।

दादी ने झट से बाद बदलकर कहा- “वो छोड़ ये बता कि स्कूल से जो चोकलेट मिली थी उसको आज़ाद किया कि नहीं?”

“वो पिंजरे में थोड़ी है…उसको कैसे आज़ाद करूँ दादी?”

“और कैसे…पैकेट से बाहर निकाल और खा जा.. हो गयी आज़ाद”

दादी की ये बात सुनकर ननकू को मज़ा आ गया और वो हँसने लगा उसे हँसते देखकर शुरू हो गया डान्स रसगुल्ला और चीकू का भी…साथ में ननकू का डान्स भी हो गया शुरू।

“असली आज़ादी तो बच्चों के पास ही है..मन की आज़ादी..”

दादी ने बाहर आयी माँ को देखकर कहा, दोनों मिलकर ननकू और पार्टी का डान्स देखने लगे।

(ननकू को तो दादी ने आज़ादी का मतलब समझाया है लेकिन क्या आप जानते हैं असली आज़ादी क्या होती है?..हमें बताइएगा अपनी बातें और ननकू के क़िस्से तो जारी रहेंगे..अरे हाँ, आपने पंद्रह अगस्त में क्या-क्या किया ये भी बताइएगा हमें)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!