Day: February 9, 2021

ग़ज़ल शाइरी

इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं…ज़हरा निगाह

इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं आने वाले बरसों ब’अद भी आते हैं हमने जिस रस्ते पर उसको छोड़ा है फूल अभी तक उस पर खिलते जाते हैं दिन में किरनें आँख-मिचोली खेलती हैं रात गए कुछ जुगनू मिलने जाते हैं देखते-देखते इक घर के रहने वाले अपने अपने ख़ानों में बट जाते हैं […]

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