घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की कहानी “ढपोरशंख” का पहला भाग

ढपोरशंख- मुंशी प्रेमचंद  भाग-1  मुरादाबाद में मेरे एक पुराने मित्र हैं, जिन्हें दिल में तो मैं एक रत्न समझता हूँ पर पुकारता हूँ ढपोरशंख कहकर

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परिचर्चा 2 में ‘हिन्दी साहित्यिक विधाओं में महिलाओं की कमी’ और ‘भाषा का विज्ञान’ विषयों पर हुई चर्चा

साहित्य दुनिया और जस्ट बुक्स अंधेरी की ओर से गुज़िश्ता रविवार को आयोजित की गई परिचर्चा में दो विषयों पर चर्चा की गई- ‘हिन्दी साहित्यिक

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