ननकू के सीक्रेट में गुड्डू अंकल

“हाँ दादी, पर माँ को तो पता चल जाएगा न?” ननकू फ़ोन पर कम-आवाज़ में दादी से बात कर रहा था, रसगुल्ला नीचे से ननकू को इशारे कर रहा था…
“दादी हैं…मुझे करने दे बात”, रसगुल्ला की ओर देखकर ननकू ने कहा.. रसगुल्ला ननकू के पाँव के पास बैठ गया
“क्या कह रहा है रसगुल्ला…”दादी ने ननकू से पूछा…
“अरे आप उसे छोड़ो, मुझे बताओ न…क्या करूँ मैं..आप ही ने कहा न माँ को भी नहीं पता चले और नानी को भी” ननकू ने दादी से अपनी परेशानी का हल जानना चाहा।
“मैंने गुड्डू अंकल को बोला है, वो आएँगे तो उनसे सामान तुम ले लेना… माँ पूछेगी तो उसको बोलना दादी से बात करें”
“माँ से ऐसा बोलूँ मैं!” ननकू ने ज़रा परेशान सा होकर कहा…
“जैसा बोला वैसा ही करना तुम”
दादी से बात करने के बाद ननकू और रसगुल्ला आपस में खेलने लगे। रसगुल्ला अपनी पूँछ हिला-हिलाकर ननकू को कुछ समझाने की कोशिश कर रहा था..
“अरे यार, मुझे पता है…तू सोच रहा है कि अंकल तो मान लो दे देंगे,उसके बाद मम्मी से कैसे छुपाएँगे”
रसगुल्ला ने प्यारा सा चेहरा बनाया, इतने में दरवाज़े पर कोई आया। माँ बाहर आयी ही थीं कि ननकू ने कहा,”मेरे लिए है, मेरे लिए…दादी ने भिजवाया”
“अच्छा..अच्छा, गुड्डू अंकल को नमस्ते तो कर लो पहले..”
ननकू ने उन्हें नमस्ते किया और जल्दी से छोटा सा बैग उनसे ले लिया…
“क्या है गुड्डू? क्या भिजवाया माँ जी ने?”
“मुझे भी पता नहीं है, मम्मी ने कहा कि ननकू की दादी का फ़ोन आया था और ये कुछ सामान भिजवाया था तो मैं लेकर आया..”
“अच्छा…तो ये पूरा गैंग है, तुम भी इसमें शामिल हो”
“अरे…नहीं नहीं दीदी…” गुड्डू ने बचते हुए कहा।
“अच्छा बैठो तो…चाय बनाती हूँ”
माँ जैसे ही चाय बनाने गईं गुड्डू अंकल के पास ननकू आया और उनसे वो कुछ तो बात करने लगा..ये सब माँ किचन की खिड़की से चुपके चुपके देख रहीं थीं। उन्होंने गुड्डू अंकल को आवाज़ दी..
“इधर तो आओ तुम…”
“जी दीदी..”, वो जल्दी से उठ कर दीदी के बुलाने पर किचन गए।
“क्या हँगामा है ये? क्या चल रहा है?”
” हँगामा? नहीं तो…मैं तो ननकू के साथ खेल रहा था”
वो ये कहते हुए वापिस ननकू के पास जाने लगे और कहने लगे…
“अच्छा दीदी, शाम को मुझे गाँव में किसी से मिलना है और मेरे गाँव की सवारी तो मिल नहीं सकेगी तो कल ही जाऊँगा”
“ठीक है”
माँ को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि चक्कर क्या है। इतने में नानी पास के घर से आयीं।
ननकू ने उनसे पूछा,”नानी आप रोज़-रोज़ क्यों जाती हो पड़ोस की नानी के यहाँ”
नानी ने ननकू के गालों पर प्यार करते हुए कहा,”उनकी छोटी बिटिया की शादी है अगले महीने, तो मैं उनकी मदद करने जाती हूँ”
“अच्छा..पर क्या आपको पता है नानी, आज के दिन क्या हुआ था?”
नानी ने मन ही मन में विचार करने के बाद माँ और गुड्डू अंकल की तरफ़ देखा, माँ को अचानक ये कुछ ख़याल आया और उनका चेहरा खिल गया।
“बेटा, कुछ तो हुआ ही होगा…तेरी नानी की उम्र बढ़ रही है, कहाँ याद रहेगा उन्हें कुछ”, नानी ने ननकू के गाल पर हाथ फेरते हुए कहा।
माँ ने गुड्डू अंकल के पास आकर उसके कान में कहा,”तो ये छुपा रहे थे तुम…तो क्या प्रोग्राम है?”
“ये तो आप ननकू से ही पूछ लो” उन्होंने अपनी दीदी को फिर कुछ न बताते हुए टाला।

ननकू ने रसगुल्ला को गोद में लिया और गुड्डू अंकल को गेस्ट रूम में ले गया। वो गुड्डू अंकल से बात कर ही रहा था कि माँ आ गईं..
“मुझे अब पूरी तरह से मालूम चल चुका है कि तुम लोग मुझसे क्या छुपा रहे हो…अब मुझसे छुपाने का कोई फ़ायदा नहीं है बल्कि मुझसे मदद ले सकते हो कुछ”
गुड्डू अंकल ने चुपचाप सर झुकाया हुआ था, रसगुल्ला तुरंत सामने से हट कर गुड्डू अंकल के पीछे चला गया…ननकू ने माँ की ओर देखकर कहा..
“नहीं तो…हम तो कुछ नहीं छुपा रहे”
“अच्छा तुम ये नहीं छुपा रहे कि तुम नानी का जन्मदिन मनाने के लिए ये सब खेल कर रहे हो, तुम लोगों ने नानी के लिए केक का इंतज़ाम किया है और वो भी कम चीनी वाला…”
माँ ने आँखों की त्योरियाँ चढ़ाते हुए ननकू की ओर देखा…
“सोच लो, अगर मुझे टीम में नहीं लिया तो मैं नानी को सब समय से पहले बता दूँगी” माँ ने प्यारी धमकी देते हुए ननकू से कहा…
ननकू झट से दौड़ कर आया और अपनी माँ के पैरों से लिपट गया, माँ ने उसे गोद में ले लिया। ननकू ने अपनी माँ को सब बताना शुरू किया..
“और न माँ, दादी ने मुझे कहा कि किसी को बताओगे तो सरप्राइज़ रह नहीं जाएगा और न..दादी ने हेल्प करने को गुड्डू अंकल को भी भेज दिया”
माँ ने ननकू से कहा,”केक बैग से निकालो और मुझे दे दो, मैं फ़्रिज में रख देती हूँ..ठीक रहेगा..”, ननकू ने माँ को बैग दे दिया.. माँ ने उसे संभाल कर फ़्रिज में रख दिया.
ननकू, गुड्डू अंकल और माँ ने कमरे को सजाना शुरू किया। गुड्डू अंकल जो बैग लाए थे वो भी खुला उसमें ग़ुब्बारे और दूसरी सजावट की चीज़ें थीं…शाम होते-होते विन्नी, विक्की और नैंसी भी आ गए.. उन्हें माँ ने बुलवा लिया था।
“अरे वाह, आज तो बड़े सारे फूल घर में खिले हैं..” नानी ने घर में ढेर सारे बच्चों को देखते हुए कहा..
“हाँ माँ, आज सब यहीं रुकेंगे..इनके घर पर बता दिया है, डॉली भी आज यहीं रुकेगी..”
“अच्छा… ये तो बड़ी अच्छी बात है..बेटी इनके और डॉली के रुकने का इंतज़ाम अपने कमरे में करवा दो और तुम मेरे साथ सो जाना, गुड्डू को गेस्ट रूम में आराम से सोने देना,” नानी ने समझाते हुए कहा..
“जी अच्छा माँ..”

शाम 7 बजे…

माँ ने ननकू से कहा…”तुम नानी के पास जाओ अब और बोलो नानी को कि गुड्डू अंकल बुला रहे हैं”
ननकू माँ की बात सुनकर जैसे ही आगे बढ़ा उसके पीछे-पीछे रसगुल्ला भी चल पड़ा..माँ ने उसे झट से गोद में लिया..
“तुम रुको यहीं..” उन्होंने रसगुल्ला की पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा..
“नानी, गुड्डू अंकल बुला रहे हैं” ननकू ने अपनी प्यारी सी भोली ज़बान में नानी से कहा…
“अच्छा..”
नानी ने माँ की तरफ़ इशारा किया,”तुम जाके देखो तो क्या कह रहा है गुड्डू”
“मुझे थोड़ा किचन में काम है, आप देखिए न”
“अच्छा बाबा, मैं ही देखती हूँ…ख़ुद भी तो आ सकता था कोई बात थी तो..अच्छा, कुछ उसकी माँ ने मुझसे कहलवाया होगा” नानी अपने आप ही से बात करते हुए घर की बायीं ओर बने गेस्ट रूम में पहुँचीं… वहाँ बिल्कुल रौशनी नहीं थी…
“कुछ भी तो नज़र नहीं आ रहा”
नानी के पीछे-पीछे माँ,डॉली, ननकू, रसगुल्ला और सारे बच्चे आ गए… सब चुप थे…नानी ने दरवाज़े के बग़ल में लगे लाइट के स्विच को दबाया…रौशनी हुई..और सबने एक सुर में…
“हैपी बर्थडे टू यू… हैपी बर्थडे नानी…हैपी बर्थडे डिअर नानी…प्यारी प्यारी अच्छी नानी”
नानी को इस सर्पराइज़ में ढेर सारा मज़ा आ गया। गुड्डू अंकल ने बैग से केक निकाला, नानी वहीं कुर्सी पर बैठीं और केक काटा। इसके बाद ननकू, रसगुल्ला, विक्की, विन्नी और नैंसी ने ख़ूब मस्ती की। इस पूरी बात की चर्चा तो उसको अपनी दादी से करनी ही है क्योंकि आईडिया तो दादी ने ही दिया था न..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!