शा’इरी की बातें(6): वज़्न करने का तरीक़ा (3)

साहित्य दुनिया की इस सीरीज़ में हमने ‘वज़्न’ को लेकर कुछ बातें की हैं, आगे कुछ और बातें भी इस बारे में होंगी. इससे पहले कि हम आगे की बातें करें, जो अब तक हमने सीखा है उसी को दुहरा लेते हैं. इसी के साथ ही हमने सोचा है कि हम रोज़ आपको एक शे’र तक़’ती करके दिखाएँगे-

हमने बताया है कि शाइरी में वज़्न करने के लिए अक्षर या अक्षरों के जोड़ों को 1 या 2 के हिसाब से मानते हैं. किसी शब्द के वो अक्षर जो जोड़ा बना लेते हैं या कोई अक्षर अपने साथ की मात्रा की वजह से अगर मज़बूत आवाज़ देता है तो उसका वज़्न 2 लेते हैं और जो कमज़ोर आवाज़ पर रहता है उसका वज़्न 1. अगर देवनागरी लिपि के अनुसार समझें तो ‘इ’ और ‘उ’ की मात्राओं से अक्षर पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कहने का अर्थ है कि,कु, ‘सि’,’सु’,’जि’,’जु’ इत्यादि को हम 1 ही वज़्न पर लेंगे जबकि की,कू, सी, सू, से, सै इत्यादि को २ वज़्न पर लेंगे. अब इनको मिलते जुलते अलफ़ाज़ के ज़रिये समझते हैं.

चुना और चूना
चुना(12)- चु(1) ना(2)
चूना(22)- चू(2) ना(2)

बलि और बली
बलि(11)- ब(1) लि(1)
बली(12)- ब(1) ली(2)

सुना और सूना
सुना(12)- सु(1) ना(2)
सूना(22)- सू(2) ना(2)

कुल और कूल
कुल(2) – कुल(2) [यहाँ ‘कु’ की आवाज़ अकेले नाकाफ़ी है तो वो ‘ल’ के साथ जोड़ा बनाकर 2 पर आ रहा है]
कूल(21)- कू(2) ल(1)

चिर और चीर
चिर(2)- चिर(2)
चीर(21)- ची(2) र(1)

बिन और बीन
बिन(2)- बिन(2)
बीन(21)- बी(2) न(1)

जितना और जीतना
जितना(22)- जित(2) ना(2)
जीतना(212)- जी(2) त(1) ना(2) [‘जी’ अकेले ही इतना प्रभावी है कि ‘त’ अकेला रह गया और इसलिए ‘जी’ का वज़्न 2 और ‘त’ का 1, आख़िर में ‘ना’ का 2]

आज का शे’र

मीर तक़ी मेरे का शे’र-
“दिखाई दिए यूँ कि बे-ख़ुद किया,
हमें आप से भी जुदा कर चले”

अब इस शे’र को तक़ती’अ करके देखते हैं.

दि(1)खा(2) ई(2) दि(1)ए(2) यूँ(2) कि(1) बे(2) ख़ुद(2) कि(1)या(2),
ह(1)में(2) आ(2) प(1)से(2) भी(2) जु(1) दा(2) कर(2) च(1) ले(2)

ध्यान अगर दें तो दोनों मिसरों का ‘वज़्न’ 122 122 122 12 है. इसमें ये भी ध्यान दीजिएगा कि ‘इ’ और ‘उ’ की मात्राओं वाले अक्षर का वज़्न 1 लिया गया है जबकि बाक़ी मात्राओं वाले अक्षर का 2.

* दोनों मिसरे अगर एक बराबर और एक ही क्रम में वज़्न पर न हों तो शे’र बे-वज़्नी कहलाएगा.

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