व्याकरण की बातें: “शृ” और “श्री” में अंतर

हिंदी भाषा के सबसे सरल होने के बावजूद, इसके कुछ शब्द ऐसे हैं जो उच्चारण के कारण या अन्य कारण से दूसरे शब्दों का आभास देते हैं और हम इन्हें लिखने में ग़लतियाँ करते हैं। आज हम ऐसा ही एक शब्द चुनकर लाए हैं जिसमें अक्सर ग़लतियाँ देखने मिलती हैं। वो शब्द है: “शृंखला“, अक्सर इसे “श्रृंखला” लिखा जाता है, ऐसा ही एक शब्द है “शृंगार” जिसे भी “श्रृंगार” लिखा जाता है। श्रृंखला” और श्रृंगार” ये दोनों ही ग़लत हैं।

शृ और श्री में अंतर 

शृ” और “श्री” का उच्चारण अधिकांश जगह एक-सा ही होता है, कहीं-कहीं में “शृ” को “श्रु” की तरह भी उच्चारित किया जाता है। “शृ” और “श्री” में क्या अंतर है ये जानने के लिए ज़रूरी है कि हम ये जाने कि ये दोनों किस तरह से बनते हैं।

जैसा कि हम जानते हैं “श्र” एक संयुक्त वर्ण या संयुक्ताक्षर है, जो आधे “” और “” के मेल से बनता है:

श्+र्+अ=श्र

और जब इसमें ई की मात्रा लगती है तो यह “श्री” की तरह लिखा जाता है:

श्+र्+अ+ी(ई)=श्री

जबकि “शृ” दरअसल “” में “” की मात्रा लगने पर बनता है। “” की मात्रा आमतौर पर खड़ी पायी वाले अक्षरों में नीचे पायी पर उलटे “C” की आकृति के समान लगती है, लेकिन “” में इसे लगाने का तरीक़ा अलग है:

श्+अ+ृ(ऋ)= शृ

इसके लिए “” को कुछ इस तरह से लिखा जाता है कि वो आधे “श्र” की तरह दिखता है लेकिन जैसा कि हम जानते हैं कि “श्र” एक संयुक्त वर्ण है इसलिए वो आधे रूप में नहीं लिखा जा सकता। “” को मात्रा के साथ “शृ” की तरह लिखे जाने का भी एक इतिहास है, जो जानकारों से जाना जा सकता है। किस तरह ये रूप निर्धारित हुआ और इससे पहले सोचे गए अलग-अलग रूप कौन-से थे? इस पर एक लेख बहुत पहले मैंने कहीं पढ़ा था, उस लेख के मिलते ही ये जानकारी भी आपके साथ साझा करेंगे।

याद रखने योग्य बातें:

  • “शृ” श में “” की मात्रा लगने से बनता है। जबकि “श्री” संयुक्त वर्ण श्र में ई की मात्रा लगने से बनता है।
  • श्र” में अन्य मात्राएँ लगकर दूसरे शब्द भी बनते हैं। जैसे: श्रावण, श्रीखंड, श्रुति, श्रोता आदि।
  • “शृ” श में ऋ की मात्रा लगने पर ही ऐसा लिखा जाएगा, जब श में कोई और मात्रा लगेगी तो वो अपने सामान्य रूप में ही लिखा जाएगा। जैसे: शांत, शिक्षा, शीतल, शुद्ध, शून्य, शोर, शौर्य आदि।

कहते हैं कि जिस तरह हम अपने पहनावे आदि से अपना “शृंगार” करते हैं, उसी तरह किसी भी भाषा का “शृंगार” व्याकरण से होता है। व्याकरण की “शृंखला” में हम बातें तो कई बताते हैं पर इसको व्यवहार में लाने के लिए ज़रा परिश्रम करना पड़ेगा। इस मेहनत से अगर थक जाएँ तो “श्रीखंड” खा लीजिएगा।

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