व्याकरण की बातें(7): ए और ऐ की मात्रा में अंतर और उनका उपयोग

व्याकरण की बातें- ए और ऐ की मात्रा में अंतर और उनका उपयोग

हिंदी वर्णमाला के 52 वर्ण व्यंजन और स्वरों में बँटे हैं। स्वर 11 हैं, जो मात्राओं के रूप में प्रयोग होते हैं। इनमें अधिकांश स्वर ऐसे हैं जिनके उच्चारण और मात्राओं में थोड़ा ही अंतर है, ऐसे में अगर किसी भी स्वर का स्थान किसी दूसरे स्वर को दे दिया जाए तो अशुद्धि होती है,। कई बार तो शब्द का अर्थ तक बदल जाता है। ऐसी छोटी-छोटी अशुद्धियाँ टाली जा सकें, इसके लिए ज़रूरी है कि हम उन स्वरों के उच्चारण और मात्राओं में अंतर समझ लें, साथ ही कुछ ऐसे शब्दों को भी समझें जिसमें मात्राओं के अंतर से अर्थ परिवर्तन की सम्भावना होती है।

आज हम जिन स्वरों की बात करेंगें वो हैं; “ए” और “ऐ”

 

उच्चारण:

सही उच्चारण जानने का एक सबसे सरल रास्ता है, पुराने फ़िल्मी गीत। नए इसलिए नहीं कह सकते क्योंकि अधिकांश में उच्चारण की त्रुटि होती है और नए-नए शब्दों के मेल को आजकल गीतों में शामिल किया जाने लगा है। तो सबसे पहले “ए” और“ऐ” के उच्चारण को जानते हैं।

“ए” के सही उच्चारण के लिए आप सुन सकते हैं- “मेरा नाम जोकर” फ़िल्म का गीत “ए भाई ज़रा देख के चलो”..अब ये बात भी ध्यान में रखने की है कि जिस भी अक्षर में “ए”  की मात्रा लगेगी उसका उच्चारण उस अक्षर के साथ “ए” का स्वर लिए होगा। जैसे इसी गीत की लाइन में “देख के चलो”में “के” का होगा। इसी तरह बाक़ी अक्षरों का भी उच्चारण आप कर सकते हैं।

अब “ऐ”के सही उच्चारण के लिए आप सुन सकते हैं-“CID”  फ़िल्म का गीत “ऐ दिल है मुश्किल जीना यहाँ ज़रा हटके ज़रा बचके ये है बॉम्बे मेरी जान”…ये बात भी ध्यान में रखने की है कि जिस भी अक्षर में “ऐ”की मात्रा लगेगी उसका उच्चारण उस अक्षर के साथ “ऐ”का स्वर लिए होगा। जैसे इसी गीत की लाइन में “ये है बॉम्बे में “है” का होगा। इसी तरह बाक़ी अक्षरों का भी उच्चारण आप कर सकते हैं।

उच्चारण जानने के बाद सही मात्रा लगाना काफ़ी आसान काम है। कुछ आम ग़लतियाँ जो देखने में आती हैं वो “ए” की जगह “ऐ” की मात्रा लगाना है। इन दोनों मात्राओं में फ़र्क़ है “ए” की मात्रा शिरोरेखा के ऊपर सिर्फ़ एक आड़ी रेखा ( )होती है और “ऐ” में यही आड़ी रेखा दो ( ै ) हो जाती है। लेकिन अक्सर हम “ए” की जगह “ऐ” की मात्रा लगा देते हैं और कई बार “ऐ” की जगह “ए” की भी..

जैसे- ट्रैन (सही शब्द ट्रेन होगा)

इसी तरह कभी-कभी “ऐ”से शुरू होने वाले शब्द में भी “” लिखकर ऊपर “” की मात्रा लगा देते हैं, जो ग़लत है।

जैसे: ऐसा को एैसा , जैसा, तैसा, पैसा में तो ये मात्रा सही है लेकिन ऐसा में नहीं। ऐसा में “” ही लगा है तो इसमें मात्रा नहीं लगेगी क्योंकि स्वर ही शामिल है।

अर्थ परिवर्तन:

सिर्फ़ एक मात्रा की ग़लती से भी पूरे शब्द का अर्थ बदल सकता है और कई बार अर्थ का अनर्थ भी हो सकता है। यहाँ कुछ ऐसे शब्दों को शामिल कर रहे हैं जहाँ मात्रा से ही अर्थ में परिवर्तन होता है। बायीं (लेफ़्ट) ओर “ए” की मात्रा के साथ शब्द हैं और दाहिनी(राइट) ओर “ऐ” की मात्रा के साथ, साथ ही दोनों के अर्थ भी लिखे हैं:

-में(किसी चीज़ में शामिल)  – मैं(ख़ुद के लिए प्रयुक्त शब्द)

उदाहरण“मैं”ख़ुद “में”बदलाव लाना चाहता हूँ।

-मेल(मिलना, मिलाप) – मैल( गंदगी, दोष, विकार)

उदाहरण- आपस में“मेल” रखें, मन का “मैल” साफ़ होगा।

 

-बेर(एक फल) – बैर(द्वेष भाव)

उदाहरण- “बेर” खट्टा और मीठा दोनों हो सकता है लेकिन आपस में  “बैर” रखना कभी अच्छा नहीं होता।

 

-बेल(लता, एक फल)– बैल (गौ जाति नर)

उदाहरण- घर में करेले की एक “बेल” फैल रही है, उसे “बैल” से बचाना होगा।

 

-पेर (पेरना/गन्ना आदि को पिसना)– पैर (पाँव, पद)

उदाहरण- गन्ना “पेरने”की मशीन तो बड़ी भारी है, मेरा “पैर” उसमें दब गया था।

 

-चेन (अंग्रेज़ी- गले में पहनने का परिधान)– चैन (सुकून, आराम)

उदाहरण- तुमने मुझसे सोने की “चेन” क्या माँगी, मेरा तो सुख- “चैन”ही चला गया।

 

-रेन (अंग्रेज़ी-बारिश)– रैन (रात्रि, रात)

उदाहरण- शाम से“रेन”ऐसी चल रही है कि आज की “रैन” बिना चाँद के गुज़रेगी।(ये वाक्य व्याकरण की दृष्टि से सही शायद ही माना जाए, सिर्फ़ शब्दों के अंतर के लिए लिखा गया है)

 

-फ़ेल (अंग्रेज़ी- असफल होना)– फैल (फैलना/ विस्तार या आच्छादित होना, पसरना)

उदाहरण- वो ज़मीन में “फैल”गया था, “फ़ेल” होते ही जनाब के लक्षण सामने आ गए।

 

जेल(कारागार)– जैल(अंग्रेज़ी- थोड़ा ठोस चिपचिपा पदार्थ, हेयर जेल)

-उदाहरण- “जैल”लगाकर बाल सजाए तो क्या बुरे काम के लिए “जेल”नहीं जाना होगा।

आशा है आपको आज की “ये” पोस्ट अच्छी लगी होगी। इस पोस्ट “में”शामिल बातों पर ग़ौर कीजिएगा। “मैंने” सिर्फ़ वही शब्द लिखे हैं जो मुझे मिले, हो सकता है आपको भी कुछ शब्द “ऐसे” मिलते हों “जिनमें” मात्राओं की त्रुटि से अर्थ बदल जाते हों। हमारे साथ “ऐसे” शब्द ज़रूर बाँटें।

 

 

 

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