घनी कहानी छोटी शाखा: सत्यजीत रे की कहानी “कॉर्वस” का अंतिम भाग

कॉर्वस- सत्यजीत रे

भाग- 6

(अब तक आपने पढ़ा…इस कहानी में हमें लेखक सत्यजीत रे ने एक वैज्ञानिक श्रीमान शोंकू की डायरी की बातें हमें पढ़ रहे हैं। वैज्ञानिक शोंकू को बचपन से ही पक्षियों में काफ़ी रुचि रही है और इस रुचि में बढ़ोतरी होती है जब एक दिन उनकी पालतू मैना “भूचाल-भूचाल” चिल्लाने लगती है और अगले दिन अख़बार की ख़बर से पता चलता है कि सच में भूचाल आया था। कुछ सालों बाद अपने अन्य शोध से समय मिलने पर श्रीमान शोंकू पक्षियों को मनुष्य के गुण सिखाने वाली एक मशीन बनाते हैं और एक होशियार कौवे को इसके उपयुक्त पाकर उसे चुनते हैं। उसका नाम वो “कॉर्वस” रखते हैं। कॉर्वस जल्दी ही सारी चीज़ें सीख जाता है और वो लिखकर संवाद भी करने लगता है, वो हावभाव भी पढ़ना जानता है। उसकी इन ख़ूबियों को प्रदर्शित करने के लिए वैज्ञानिक शोंकू उसे सैंटियागो के पक्षी सम्मेलन में ले जाते हैं, जहाँ कॉर्वस को ख़ूब तारीफ़ मिलती हैं। साथ ही उसकी तस्वीर एक अख़बार में भी आती है। दूसरी ओर अतिथियों के सम्मान और मनोरंजन के लिए रखे गए जादू के शो में वैज्ञानिक शोंकू जादूगर ऑर्गस को देखते हैं जो अपने जादू के शो में पक्षियों का ही ज़्यादा इस्तेमाल करता है। फिर भी उसके पास कॉर्वस जितना होशियार एक भी पक्षी नहीं दिखता, उसी रात जादूगर वैज्ञानिक शोंकू और कॉर्वस से मिलने की चाह लिए उनके होटल पहुँचता है। जहाँ कॉर्वस जब बात न करने की इच्छा जताते हुए कमरे की लाइट बंद करके अपने पिंजरे में चले जाता है, तो जादूगर उससे प्रभावित होकर उसे अपने पक्षियों में शामिल करना चाहता है। लेकिन वैज्ञानिक शोंकू उसे साफ़ मना कर देते हैं, जब जादूगर की बात, उसके सम्मोहन का जादू और पैसों का लालच भी काम नहीं आता तो उसे वहाँ से जाना पड़ता है। लेकिन अगले ही दिन वो कॉर्वस को चुरा ले जाता है। वैज्ञानिक शोंकू पुलिस बल के साथ कॉर्वस की तलाश में निकलते हैं। उन्हें ये तो पता होता है कि जादूगर कभी भी कॉर्वस को नुक़सान नहीं पहुँचाएगा लेकिन वो ये भी जानते हैं कि कॉर्वस को जादूगर पसंद नहीं है। आख़िर लम्बी दूरी तय करने के बाद उन्हें जादूगर ऑर्गस की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त मिलती है जहाँ सामने का हिस्सा बुरी तरह बर्बाद हो चुका है। अब आगे…)

कैरिरस के मुंह से निकला – “अरे! यही तो मिस्टर ऑर्गस की कार है…इसी रंग की सैन्टियागो में एक कार और है जो बैंकर मिस्टर कैलडेमस की है। पर इस गाड़ी को तो मैं इसकी नंबर प्लेट से भी जानता हूँ”

कार तो मिल गई पर ऑर्गस कहाँ गया? कॉर्वस का भी कोई पता न था। गर्दन डालकर मैंने कार की खिड़की से भीतर झाँका।

ड्राइवर की सीट के बगल में कॉर्वस का पिंजरा ख़ाली पड़ा था। इसकी चाबी मेरी जेब में थी। मैंने इसे ताला नहीं लगाया था, दोपहर को वैसे ही बन्द किया था। ऐसे में कॉर्वस दरवाजा खोलकर पिंजरे से बाहर भी आ सकता था। पर वह आख़िर था कहाँ?

अचानक हमने कुछ दूर से आती एक तेज़ चीख सुनी। कैरिरस तथा दूसरे सिपाही की उँगलियाँ बन्दूकों पर जम गईं पर ड्राइवर बड़ा डरपोक निकला।

“जादूगरों के नाम से ही मुझे तो जाने क्यों बड़ा डर सा लगता है” – वह डरकर ज़मीन पर बैठ गया और लगा प्रार्थना करने। ग्रेनफैल का चेहरा भी लटक गया था।

“तुम वहीं कार में रहो ग्रेनफैल!” मैंने उसे सलाह दी

चीख-चिल्लाहटें और पास आ गईं। सड़क के बाईं तरफ पेड़ों और झाड़ियों के नीचे से कोई शोर मचा रहा था। कल रात मैंने ऑर्गस को केवल धीमे फुसफुसाते स्वर में ही बोलते सुना था इसलिए पहचान पाने में थोड़ी देर ज़रूर लगी पर मैं समझ गया कि यह आवाज ऑर्गस की ही थी। वह स्पेनिश में चुन-चुनकर कॉर्वस को गालियाँ दे रहा था। मैंने कई बार उसे कॉर्वस के लिए “शैतान” कहते सुना।

“कहाँ है वह बदमाश कौआ? कॉर्वस सत्यानाश जाए..कॉर्वस शैतान कहीं का….!”

अचानक ऑर्गस की धाराप्रवाह गालियों की बौछार जैसे थम सी गई। उसकी और हमारी निगाहें चार हुईं। हाथ में रिवाल्वर लिए वह हमसे कोई सौ कदम दूर झाड़ियों के पास खड़ा था।

कैरिरस चिल्ला पड़ा – “पिस्तौल नीचे रख दो मिस्टर ऑर्गस……” पर वाक्य पूरा होने से पहले ही कानों के पर्दे फाड़ती उसकी एक गोली चली और कार के दरवाज़े में घुस गई। कैरिरस फिर चीखा

“मिस्टर ऑर्गस! हम पुलिस वाले हैं! हथियार फेंक दो। अगर तुमने अपनी रिवाल्वर नहीं फेंकी तो हम भी गोली चलाने पर मजबूर हो जायेंगे”

“तुम मुझे मारोगे?” ऑर्गस चिल्लाया। “क्या वास्तव में पुलिस आ गई है? पर मुझे तो कुछ भी नहीं दिखलाई देता”

ऑर्गस अब हम से केवल पच्चीस गज़ दूर था। मैं एक ही पल में उसकी असलियत समझ गया। आँखों पर चश्मा न होने की वजह से वह बिल्कुल अंधा-सा हो गया था और उल्टी-सीधी गोलियाँ दाग रहा था।

आखिर में ऑर्गस ने पिस्तौल फेंक ही दी और लड़खड़ाता- सा आगे आया। पुलिस वाले भी तेज़ी से आगे बढ़े। मैं जान गया कि संकट की इस घड़ी में अब ऑर्गस की कोई बाज़ीगरी काम न आएगी। वह सचमुच बहुत दयनीय हालत में था। कैरिरस ने आगे बढ़कर ज़मीन पर पड़ा उसका पिस्तौल उठाकर अपने क़ब्ज़े में ले लिया। ऑर्गस बड़बड़ा रहा था… “वह कौआ न जाने कहाँ मर गया सत्यानाश हो जाये उसका……. कितना चालाक है वह..”

ग्रेनफैल फुसफुसा कर मुझसे कुछ कहने की कोशिश कर रहा था। मैंने सुना वह कह रहा था – “शोंकू… कौआ वहाँ है…वहाँ”

मैं नहीं समझा उसका मतलब क्या था? मुझे तो कॉर्वस कहीं भी दिखलाई नहीं पड़ रहा था। तभी ग्रेनफैल ने सड़क के पार एक ऊँचे पेड़ की चोटी की तरफ इशारा किया।

मैंने पाया मेरा दोस्त, मेरा शागिर्द, चिर परिचित प्यारा कॉर्वस पेड़ की सबसे ऊँची डाल पर बैठा हमारी तरफ प्यार भरी निगारों से ताक रहा था।

मैं पेड़ की तरफ भागा। पर वह किसी पतंग की तरह शान से तैरता हुआ हमारी मर्सडीज़ की छत पर उतर आया।

कॉर्वस ने झुककर चोंच खोली और मेरे क़दमों में रख दिया – ऑर्गस का माइनस बीस का वही हाई पावर चश्मा, जिसकी सुनहरी कमानियाँ शाम की ढलती हुई धूप में चमचमा रहीं थीं।

समाप्त

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